आपाधापी में जीवन की
कुछ दशक पहले अभाव में जिया जीवन खाकर रुखा-सूखा रहते थे निश्चिंत, प्रसन्न
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कुछ दशक पहले अभाव में जिया जीवन खाकर रुखा-सूखा रहते थे निश्चिंत, प्रसन्न
‘मुझे पहाड़ प्रिय हैं क्योंकि वह मुझे मेरे बौनेपन का अहसास कराते हैं’ - मार्क औबमास्चिक
मैं दौड़े जा रहा हूँ बेतहाशा सब कुछ पाने की मन में लिए आशा नहीं रखता हूँ पास-पड़ोस जानने की कोई जिज्ञासा
घरेलू हिंसा में हो रहा है इजाफा एक अन्य पहलु तालाबंदी का सामने आया चलो कुछ हटकर सोचें और करें नये प्रयोग तालाबंदी के दौरान करें समय का सदुपयोग